सोमवार, 23 मार्च 2026
कोलकाता की दर्दनाक घटना के बाद अब न्याय की लड़ाई राजनीति तक पहुंची, पानीहाटी सीट से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासत में एक बड़ा मोड़ देखने को मिल सकता है। Kolkata के RG Kar Medical College and Hospital में 2024 में हुई दिल दहला देने वाली घटना के बाद अब पीड़िता की मां के चुनावी राजनीति में आने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, Bharatiya Janata Party उन्हें उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है। यह वही इलाका है जहां इस मामले को लेकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता की मां ने साफ किया है कि राजनीति में आने का फैसला अचानक नहीं है। पार्टी के नेता लंबे समय से उनके संपर्क में थे। शुरुआत में उन्होंने मना किया, लेकिन राज्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब उन्होंने चुनाव लड़ने का मन बनाया है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह नहीं चाहतीं कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ, वैसा किसी और के साथ हो। उनका आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है, और इसी मुद्दे को लेकर वह अब खुलकर सामने आना चाहती हैं।
उन्होंने Mamata Banerjee सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार विफल रही है। साथ ही, उन्होंने मामले की जांच की धीमी रफ्तार पर भी असंतोष जताया और कहा कि न्याय में देरी ने उन्हें सिस्टम के खिलाफ खड़े होने के लिए मजबूर किया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि BJP इस मुद्दे को चुनाव में प्रमुख रूप से उठाने की तैयारी में है। पार्टी को उम्मीद है कि पीड़िता की मां को उम्मीदवार बनाने से महिला सुरक्षा का मुद्दा पूरे राज्य में जोर पकड़ेगा।
हालांकि, राज्य भाजपा नेतृत्व ने अभी इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। Sukanta Majumdar समेत अन्य नेताओं का कहना है कि उम्मीदवारों की अंतिम सूची केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि Indian National Congress ने भी इस संभावित फैसले का समर्थन किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर एक मां न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए राजनीति में आती है, तो यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में RG कर मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
अब अगर पीड़िता की मां चुनावी मैदान में उतरती हैं, तो यह न सिर्फ एक भावनात्मक मुद्दा बनेगा, बल्कि बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव भी ला सकता है।
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