Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले जिस तरह बड़े पैमाने पर प्रशासनिक तबादले किए जा रहे हैं, उसने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। इस पूरे विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah खुलकर Mamata Banerjee के समर्थन में आ गए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा संदिग्ध होता दिख रहा है।
सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनावी नतीजे अधिकारियों से नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व और जनता के रुझान से तय होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग चाहे जितने तबादले कर दे, इससे परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ता।
हालांकि, उनके इस बयान को कई लोग ममता सरकार के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। खासकर तब, जब बंगाल में लंबे समय से कानून-व्यवस्था, हिंदू समुदाय की सुरक्षा और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि उमर अब्दुल्ला ने पहले ही यह दावा कर दिया कि मतगणना के दिन ममता बनर्जी भारी बहुमत से जीत दर्ज करेंगी। उनके इस बयान ने चुनाव की निष्पक्षता पर भी बहस छेड़ दी है।
इस पर Bharatiya Janata Party ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कश्मीर में बैठकर बंगाल की राजनीति पर इस तरह की टिप्पणी करना साफ दर्शाता है कि यह बयान राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित है। भाजपा का आरोप है कि राज्य में पहले से ही प्रशासनिक पक्षपात और हिंदू विरोधी घटनाओं को लेकर चिंता है, और ऐसे बयान उसी माहौल को मजबूत करते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि वह बंगाल को विशेष रूप से निशाना बना रहा है और अधिकारियों के तबादले कर चुनावी समीकरण प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन विपक्ष का मानना है कि ये आरोप असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए लगाए जा रहे हैं।
जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि बंगाल की राजनीति केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान की भी लड़ाई बन चुकी है—जहां हिंदू समाज अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर ज्यादा मुखर होता दिख रहा है।