सोमवार, 23 मार्च 2026
मोहन भागवत ने कहा कि भारत मानवता और एकता के सिद्धांत पर चलता है, जबकि कुछ देश ‘ताकतवर ही टिकेगा’ की सोच में विश्वास करते हैं।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर से बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया आज विनाश के कगार पर खड़ी है और ऐसे समय में भारत के पास ही वह शक्ति और सोच है, जो सबको जोड़ सकती है।
नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की नींव रखने के बाद सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि कई देशों से यह आवाज उठ रही है कि इस संघर्ष को खत्म करने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि भारत की मूल प्रकृति ही समन्वय और एकता की है।
उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समाधान का रास्ता नहीं है, बल्कि यह स्वार्थ और वर्चस्व की भावना का परिणाम होता है। बिना किसी देश का नाम लिए उन्होंने संकेत दिया कि कुछ राष्ट्र ‘ताकतवर ही टिकेगा’ की सोच पर चलते हैं, जबकि भारत मानवता और सहअस्तित्व के सिद्धांत को मानता है।
भागवत के अनुसार, दुनिया में हो रहे संघर्षों की जड़ स्वार्थ और प्रभुत्व की चाह है। स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही संभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह लोगों के व्यवहार और जीवन में भी झलकना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर समाज में अनुशासन नहीं होगा, तो अव्यवस्था और नुकसान होना तय है। नियमों का पालन करना कठिन जरूर है, लेकिन यही समाज को सुरक्षित और संतुलित बनाता है।
भागवत ने ‘सब एक हैं’ की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान पूरी दुनिया को सौहार्द और शांति का रास्ता दिखा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संघर्ष और विरोध से दूर रहकर सहयोग, भाईचारे और एकजुटता की दिशा में आगे बढ़ें।
© 2026 newsopediabharat.com | All rights reserved by Incrementer Technology Solutions Pvt Ltd