शनिवार, 06 जून 2026
हाल में केरल का नाम बदलकर केरलम किठजाने के बाद राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ राजधानी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° का नाम इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ करने की मांग ने नया उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ पैदा किया है। यह विचार पहले मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विमरà¥à¤¶ तक सीमित था। यह 2016 में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ पांडव किला में आयोजित पà¥à¤°à¤¥à¤® इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ महोतà¥à¤¸à¤µ के दौरान वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• रूप से सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• मंच पर सामने आया। इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का आयोजन दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ डà¥à¤°à¥€à¤® टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया गया था और इसे à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार के संसà¥à¤•ृति मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ का समरà¥à¤¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ था। इसके बाद से यह विषय सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• और राजनीतिक विमरà¥à¤¶ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनता रहा। राजधानी का पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ नाम इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ सनातन परंपरा में गहराई से निहित है और दिलà¥à¤²à¥€ को राजा ढेलू की à¤à¤• छोटी बसà¥à¤¤à¥€ से संबंधित माना जाता है।
संसà¥à¤•ृत में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ का अरà¥à¤¥ समतल à¤à¥‚à¤à¤¾à¤— (पठार) à¤à¥€ होता है। इस पà¥à¤°à¤•ार इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ केवल à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• केंदà¥à¤° नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• और सांसà¥à¤•ृतिक परिदृशà¥à¤¯ के रूप में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित हà¥à¤†à¥¤ यह नाम उस कालखंड का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है जब सतà¥à¤¤à¤¾ और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ का आधार धरà¥à¤® हà¥à¤† करता था। à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ को देखते हà¥à¤ इसे पांडव राजà¥à¤¯ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के लिठचà¥à¤¨à¤¾à¥¤ महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर ने यमà¥à¤¨à¤¾ में सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कर राजसूय यजà¥à¤ž संपनà¥à¤¨ किया और इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ के चकà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¥€ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ बने। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ दयानंद के शोध और राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के नाथदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मंदिर के अà¤à¤¿à¤²à¥‡à¤–ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर से लेकर समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ यशपाल तक लगà¤à¤— 124 आरà¥à¤¯ शासकों ने यहां 4,157 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक निरंतर शासन किया, जिसमें पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• का औसत शासनकाल लगà¤à¤— 39 वरà¥à¤· रहा।
इतिहासकार हेनरी हारà¥à¤¡à¥€ कोल और à¤à¤²à¥‡à¤•à¥à¤œà¥‡à¤‚डर कनिंघम ने à¤à¥€ इसे à¤à¤¾à¤°à¤¤ की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• शहरी बसावटों में से à¤à¤• माना है। महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के सà¤à¤¾ परà¥à¤µ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ है कि इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ à¤à¤• सà¥à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ नगर था, जहां समाज के सà¤à¥€ वरà¥à¤—ों की आवशà¥à¤¯à¤•ताओं का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा गया था। यह नगर काशी जैसे अनà¥à¤¯ धारà¥à¤®à¤¿à¤• केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ से वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ सड़कों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ था। बौदà¥à¤§ परंपराओं में उलà¥à¤²à¥‡à¤– है कि बà¥à¤¦à¥à¤§ का उसà¥à¤¤à¤°à¤¾ और सà¥à¤ˆ à¤à¥€ इंदà¥à¤°à¤ªà¤¤à¥à¤¤ (इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥) में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किठगठथे, जो इसके वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है। इसके विपरीत दिलà¥à¤²à¥€ नाम की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ लोककथाओं में राजा ढेलू से जोड़ी जाती है। कहा जाता है कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने महरौली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पवितà¥à¤° विषà¥à¤£à¥à¤—िरि लौह सà¥à¤¤à¤‚ठ(जो शासन की सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• था) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को परखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया।
इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में वासà¥à¤¤à¥ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• नागदेव को चोट पहà¥à¤‚ची और सà¥à¤¤à¤‚ठकी कील ढीली हो गई। इसी ढीली किलà¥à¤²à¥€ से ढिलà¥à¤²à¤¿à¤•ा और कालांतर में दिलà¥à¤²à¥€ शबà¥à¤¦ निकला। विडंबना यह रही कि सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ इस घटना ने à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ नाम को जनà¥à¤® दिया, जो इतिहास में असà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ और अशांति की गाथा बन गया।
जो à¤à¥‚मि पहले आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•, पूजनीय थी, वह धीरे-धीरे केवल धन-संपनà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के रूप में देखी जाने लगी, जिससे विदेशी आकà¥à¤°à¤®à¤£à¤•ारियों की गिदà¥à¤§ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ इस पर पड़ी। मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ गोरी से लेकर नादिर शाह और अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ तक दिलà¥à¤²à¥€ बार-बार आकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚, लूट और विनाश का केंदà¥à¤° बनी। इन आकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ का मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ संपदा का दोहन और à¤à¤¾à¤°à¤¤ की वैदिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ परंपरा को खंडित करना था। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ उस सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤•ाल से à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ थी, जब विदेशी यातà¥à¤°à¥€ यहां केवल जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने और संवाद करने आते थे।
बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ काल में जब राजधानी कलकतà¥à¤¤à¤¾ से दिलà¥à¤²à¥€ लाई गई, तब लà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤‚स की दिलà¥à¤²à¥€ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की नगर-योजना का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ तो किया गया, लेकिन इसी दौरान कई पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संरचनाओं को मलबे में दबा दिया गया। 1913 की अधिसूचना दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• सीमा को अतà¥à¤¯à¤‚त सीमित कर केवल पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ किला तक समेट दिया गया। 1925-26 की पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¤à¥à¤µ रिपोरà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ में यहां राजा à¤à¥‹à¤œ और राजा सोहनलाल के मंदिर-लेखों का मिलना इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासकों के लंबे नियंतà¥à¤°à¤£ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करता है। आज पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ किला सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ कà¥à¤‚ती मंदिर, निगमबोध घाट का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° (जहां यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर ने अशà¥à¤µà¤®à¥‡à¤§ यजà¥à¤ž किया था), नीली छतरी मंदिर और महरौली का योगमाया मंदिर इस पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ गौरव के अंतिम जीवित पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ हैं।
सनातन संसà¥à¤•ृति में नामकरण केवल पहचान नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• संसà¥à¤•ार है। नाम बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚डीय ऊरà¥à¤œà¤¾, धà¥à¤µà¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• कंपन और मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करता है। जहां पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण कहता है कि ‘नाम में कà¥à¤¯à¤¾ रखा है’, वहीं à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मनीषा मानती है कि नाम असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾ और नियति को आकार देता है। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ जैसा नाम संरकà¥à¤·à¤£ और सकारातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है, जो नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤ªà¥‚रà¥à¤£ शासन की याद दिलाता है। इसके उलट किलà¥à¤²à¥€-ढिलà¥à¤²à¥€ या दिलà¥à¤²à¥€ जैसा नाम अपनी उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ में ही शिथिलता का संकेत देता है।
आरà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ की इस पवितà¥à¤° à¤à¥‚मि का इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ से दिलà¥à¤²à¥€ में रूपांतरण à¤à¤• गहरा सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤—त कà¥à¤·à¤°à¤£ है, जिसे हिंसा और आंदोलनों की पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि में à¤à¥€ देखा जा सकता है। इतिहास से सीख लेकर ही उस पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संतà¥à¤²à¤¨ को पà¥à¤¨à¤ƒ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया जा सकता है। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ जैसे पवितà¥à¤° तीरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€à¤µà¤¿à¤¤ होना आवशà¥à¤¯à¤• है। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ केवल नाम परिवरà¥à¤¤à¤¨ नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के विशà¥à¤µà¤—à¥à¤°à¥ काल की ओर बढ़ने का à¤à¤• निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• कदम होगा। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की छतà¥à¤°à¤›à¤¾à¤¯à¤¾ में ही राषà¥à¤Ÿà¥à¤° अपनी वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• समृदà¥à¤§à¤¿ और शांति को पà¥à¤¨à¤ƒ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकता है।
(लेखिका इतिहासकार à¤à¤µà¤‚ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ डà¥à¤°à¥€à¤® टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ की अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· हैं)हाल में केरल का नाम बदलकर केरलम किठजाने के बाद राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ राजधानी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° का नाम इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ करने की मांग ने नया उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ पैदा किया है। यह विचार पहले मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ विमरà¥à¤¶ तक सीमित था। यह 2016 में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ पांडव किला में आयोजित पà¥à¤°à¤¥à¤® इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ महोतà¥à¤¸à¤µ के दौरान वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• रूप से सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• मंच पर सामने आया। इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का आयोजन दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ डà¥à¤°à¥€à¤® टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया गया था और इसे à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार के संसà¥à¤•ृति मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ का समरà¥à¤¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ था। इसके बाद से यह विषय सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• और राजनीतिक विमरà¥à¤¶ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनता रहा। राजधानी का पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ नाम इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ सनातन परंपरा में गहराई से निहित है और दिलà¥à¤²à¥€ को राजा ढेलू की à¤à¤• छोटी बसà¥à¤¤à¥€ से संबंधित माना जाता है।
संसà¥à¤•ृत में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ का अरà¥à¤¥ समतल à¤à¥‚à¤à¤¾à¤— (पठार) à¤à¥€ होता है। इस पà¥à¤°à¤•ार इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ केवल à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• केंदà¥à¤° नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• और सांसà¥à¤•ृतिक परिदृशà¥à¤¯ के रूप में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित हà¥à¤†à¥¤ यह नाम उस कालखंड का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है जब सतà¥à¤¤à¤¾ और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ का आधार धरà¥à¤® हà¥à¤† करता था। à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ को देखते हà¥à¤ इसे पांडव राजà¥à¤¯ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के लिठचà¥à¤¨à¤¾à¥¤ महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर ने यमà¥à¤¨à¤¾ में सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कर राजसूय यजà¥à¤ž संपनà¥à¤¨ किया और इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ के चकà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¥€ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ बने। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ दयानंद के शोध और राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के नाथदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मंदिर के अà¤à¤¿à¤²à¥‡à¤–ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर से लेकर समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ यशपाल तक लगà¤à¤— 124 आरà¥à¤¯ शासकों ने यहां 4,157 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक निरंतर शासन किया, जिसमें पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• का औसत शासनकाल लगà¤à¤— 39 वरà¥à¤· रहा।
इतिहासकार हेनरी हारà¥à¤¡à¥€ कोल और à¤à¤²à¥‡à¤•à¥à¤œà¥‡à¤‚डर कनिंघम ने à¤à¥€ इसे à¤à¤¾à¤°à¤¤ की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• शहरी बसावटों में से à¤à¤• माना है। महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के सà¤à¤¾ परà¥à¤µ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ है कि इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ à¤à¤• सà¥à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ नगर था, जहां समाज के सà¤à¥€ वरà¥à¤—ों की आवशà¥à¤¯à¤•ताओं का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा गया था। यह नगर काशी जैसे अनà¥à¤¯ धारà¥à¤®à¤¿à¤• केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ से वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ सड़कों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ था। बौदà¥à¤§ परंपराओं में उलà¥à¤²à¥‡à¤– है कि बà¥à¤¦à¥à¤§ का उसà¥à¤¤à¤°à¤¾ और सà¥à¤ˆ à¤à¥€ इंदà¥à¤°à¤ªà¤¤à¥à¤¤ (इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥) में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किठगठथे, जो इसके वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है। इसके विपरीत दिलà¥à¤²à¥€ नाम की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ लोककथाओं में राजा ढेलू से जोड़ी जाती है। कहा जाता है कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने महरौली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पवितà¥à¤° विषà¥à¤£à¥à¤—िरि लौह सà¥à¤¤à¤‚ठ(जो शासन की सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• था) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को परखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया।
इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में वासà¥à¤¤à¥ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• नागदेव को चोट पहà¥à¤‚ची और सà¥à¤¤à¤‚ठकी कील ढीली हो गई। इसी ढीली किलà¥à¤²à¥€ से ढिलà¥à¤²à¤¿à¤•ा और कालांतर में दिलà¥à¤²à¥€ शबà¥à¤¦ निकला। विडंबना यह रही कि सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ इस घटना ने à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ नाम को जनà¥à¤® दिया, जो इतिहास में असà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ और अशांति की गाथा बन गया।
जो à¤à¥‚मि पहले आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•, पूजनीय थी, वह धीरे-धीरे केवल धन-संपनà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के रूप में देखी जाने लगी, जिससे विदेशी आकà¥à¤°à¤®à¤£à¤•ारियों की गिदà¥à¤§ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ इस पर पड़ी। मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ गोरी से लेकर नादिर शाह और अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ तक दिलà¥à¤²à¥€ बार-बार आकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚, लूट और विनाश का केंदà¥à¤° बनी। इन आकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ का मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ संपदा का दोहन और à¤à¤¾à¤°à¤¤ की वैदिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ परंपरा को खंडित करना था। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ उस सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤•ाल से à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ थी, जब विदेशी यातà¥à¤°à¥€ यहां केवल जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने और संवाद करने आते थे।
बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ काल में जब राजधानी कलकतà¥à¤¤à¤¾ से दिलà¥à¤²à¥€ लाई गई, तब लà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤‚स की दिलà¥à¤²à¥€ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की नगर-योजना का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ तो किया गया, लेकिन इसी दौरान कई पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संरचनाओं को मलबे में दबा दिया गया। 1913 की अधिसूचना दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• सीमा को अतà¥à¤¯à¤‚त सीमित कर केवल पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ किला तक समेट दिया गया। 1925-26 की पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¤à¥à¤µ रिपोरà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ में यहां राजा à¤à¥‹à¤œ और राजा सोहनलाल के मंदिर-लेखों का मिलना इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासकों के लंबे नियंतà¥à¤°à¤£ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करता है। आज पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ किला सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ कà¥à¤‚ती मंदिर, निगमबोध घाट का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° (जहां यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर ने अशà¥à¤µà¤®à¥‡à¤§ यजà¥à¤ž किया था), नीली छतरी मंदिर और महरौली का योगमाया मंदिर इस पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ गौरव के अंतिम जीवित पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ हैं।
सनातन संसà¥à¤•ृति में नामकरण केवल पहचान नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• संसà¥à¤•ार है। नाम बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚डीय ऊरà¥à¤œà¤¾, धà¥à¤µà¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• कंपन और मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करता है। जहां पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण कहता है कि ‘नाम में कà¥à¤¯à¤¾ रखा है’, वहीं à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मनीषा मानती है कि नाम असà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¾ और नियति को आकार देता है। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ जैसा नाम संरकà¥à¤·à¤£ और सकारातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है, जो नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤ªà¥‚रà¥à¤£ शासन की याद दिलाता है। इसके उलट किलà¥à¤²à¥€-ढिलà¥à¤²à¥€ या दिलà¥à¤²à¥€ जैसा नाम अपनी उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ में ही शिथिलता का संकेत देता है।
आरà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ की इस पवितà¥à¤° à¤à¥‚मि का इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ से दिलà¥à¤²à¥€ में रूपांतरण à¤à¤• गहरा सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤—त कà¥à¤·à¤°à¤£ है, जिसे हिंसा और आंदोलनों की पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि में à¤à¥€ देखा जा सकता है। इतिहास से सीख लेकर ही उस पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संतà¥à¤²à¤¨ को पà¥à¤¨à¤ƒ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया जा सकता है। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ जैसे पवितà¥à¤° तीरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€à¤µà¤¿à¤¤ होना आवशà¥à¤¯à¤• है। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ केवल नाम परिवरà¥à¤¤à¤¨ नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के विशà¥à¤µà¤—à¥à¤°à¥ काल की ओर बढ़ने का à¤à¤• निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• कदम होगा। इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ की छतà¥à¤°à¤›à¤¾à¤¯à¤¾ में ही राषà¥à¤Ÿà¥à¤° अपनी वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• समृदà¥à¤§à¤¿ और शांति को पà¥à¤¨à¤ƒ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकता है।
(लेखिका इतिहासकार à¤à¤µà¤‚ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ डà¥à¤°à¥€à¤® टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ की अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· हैं)
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